Published On: Wed, Aug 4th, 2021

आगरा: खतरे के निशान पर बह रही चंबल, 12 गांवों से कटा संपर्क


चंबल इलाके में करीब 38 गांवों में चंबल नदीं ने नींद उड़ा दी हैं। इन गांवों में मंगलवार को ग्रामीण रात भर जागते रहे।

आगरा. राजस्थान और एमपी में मूसलाधार बारिश से पिनाहट में चंबल नंदी खतरे के निशान पर बह रही है। बरसात के कारण नदियां उफान पर हैं। जिले के एक दर्जन गांवों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। गांवों को जोड़ने वाले रास्ते पानी में डूब गए हैं। जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह प्रभावित गांवों का जायजा लिया। पांच गांवों में स्टीमर से आवाजाही शुरू कराई है।

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जिले में यमुना लाल निशान से तीन कदम दूर बह रही है। मंगलवार शाम को वाटरवर्क्स पर जलस्तर 492 फीट पहुंच गया। 495 फीट लो फ्लड लेवल है। यमुना के उफान से दयालबाग, मोहनपुर, खासपुर, बाईपुर मुस्तकिल समेत एक दर्जन गांव में खेत डूब गए हैं। गोकुल बैराज से रिकार्ड 49281 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है।

रातों में सो नहीं रहे हैं ग्रामीण

चंबल इलाके में करीब 38 गांवों में चंबल नदीं ने नींद उड़ा दी हैं। इन गांवों में मंगलवार को ग्रामीण रात भर जागते रहे। झरना पुरा, पुरा डाल, जेबरा, डगोरा, उमरैठा पुरा, क्योरी, रेहा आदि गांवों से रास्ते पूरी तरह से डूब गए हैं। धांधू पुरा, पुरा भगवान, मुकुटपुरा, हरलाल पुरा, उमरैठा, क्यारी, बरहा, सिमराई गांवों के फसलें जलमग्न हो गईं हैं।

हालात चिंताजनक

चंबल से धौलपुर और पिनाहट में हालात चिंताजनक हो गए हैं। धौलपुर में यमुना नदी खतरे के निशान से 12 मीटर ऊपर बह रही है। यहां 130 मीटर पर लाल निशान है। मंगलवार शाम धौलपुर में चंबल का जलस्तर 141 मीटर पहुंच गया है। पिनाहट में चंबल 129 मीटर पर पहुंच गई है। 130 मीटर पर खतरे का निशान है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के रिपोर्ट मुताबिक बुधवार तक पिनाहट में चंबल लाल निशान से तीन मीटर ऊपर 133 मीटर तक पहुंच सकती है।

इन गावों शुरू हुई स्टीमर से आवाजाही

डीएम प्रभु नारायण सिंह ने बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लेने के बाद गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढ़ैया और गुढ़ा गांव में स्टीमर से आवाजाही शुरू करा ही है। बरसात में नदियां उफान पर हैं।

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने बताया कि एडीएम वित्त एवं राजस्व और एसडीएम को प्रभावित गांव में 24 घंटे निगरानी के निर्देश दिए हैं। राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय हैं। प्रभावित ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। स्थिति बेकाबू होते ही ग्रामीणों को विस्थापित किया जा सकता है। प्रभावित गांव में एडीएम व एसडीएम ने राजस्व टीमों के साथ आपदा प्रबंधन के लिए मोर्चा संभाल लिया है।

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