Published On: Sun, Aug 29th, 2021

इस बार विशेष योग में पड़ रही जन्माष्टमी


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आलापुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी। सनातन वैदिक आश्रम के पं. आचार्य आशुतोष शुक्ल ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होती है, तो उसे कृष्ण जयंती महायोग के नाम से जाना जाता है।
विष्णु धर्मोत्तर पुराण के अनुसार अर्ध रात्रि में रोहिणी नक्षत्र शुरू होने पर कृष्ण जन्माष्टमी होती है। इसमें भगवान कृष्ण की अर्चना 3 जन्मों के पापों को नष्ट कर देने वाली होती है। मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होने पर बाल रूपी चतुर्भुज भगवान श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि अर्धरात्रि में दृश्य होती है, तो कृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य काल होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब भी रोहिणी से युक्त होती है तो उसे जयंती योग कहते हैं। यह शुभ योग मनुष्य के समस्त पापों को हरने वाला होता है। यह जयंती नाम का योग कई वर्षों में कभी-कभी प्राप्त होता है।
29 अगस्त को अष्टमी तिथि रात्रि 10.10 बजे लग जाएगी जो कि 30 अगस्त को रात्रि 12.14 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र 30 अगस्त को प्रात: 6.41 बजे प्रारंभ हो जाएगा जो 31 अगस्त को दिन में 9.19 बजे तक रहेगा। 30 अगस्त को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का योग तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का विशिष्ट निशीथकाल रात्रि 11.41 बजे से 12.25 बजे तक रहेगा। यह पुण्य काल भगवान श्रीकृष्ण के पूजन-अर्चन के लिए विशिष्ट फलदायी रहेगा।

आलापुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी। सनातन वैदिक आश्रम के पं. आचार्य आशुतोष शुक्ल ने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होती है, तो उसे कृष्ण जयंती महायोग के नाम से जाना जाता है।

विष्णु धर्मोत्तर पुराण के अनुसार अर्ध रात्रि में रोहिणी नक्षत्र शुरू होने पर कृष्ण जन्माष्टमी होती है। इसमें भगवान कृष्ण की अर्चना 3 जन्मों के पापों को नष्ट कर देने वाली होती है। मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र से संयुक्त होने पर बाल रूपी चतुर्भुज भगवान श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे। रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि अर्धरात्रि में दृश्य होती है, तो कृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य काल होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब भी रोहिणी से युक्त होती है तो उसे जयंती योग कहते हैं। यह शुभ योग मनुष्य के समस्त पापों को हरने वाला होता है। यह जयंती नाम का योग कई वर्षों में कभी-कभी प्राप्त होता है।

29 अगस्त को अष्टमी तिथि रात्रि 10.10 बजे लग जाएगी जो कि 30 अगस्त को रात्रि 12.14 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र 30 अगस्त को प्रात: 6.41 बजे प्रारंभ हो जाएगा जो 31 अगस्त को दिन में 9.19 बजे तक रहेगा। 30 अगस्त को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का योग तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का विशिष्ट निशीथकाल रात्रि 11.41 बजे से 12.25 बजे तक रहेगा। यह पुण्य काल भगवान श्रीकृष्ण के पूजन-अर्चन के लिए विशिष्ट फलदायी रहेगा।



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