कानपुर: डेंगू के चार मरीज मिले, बुखार से दो की मौत, वायरल के साथ निमोनिया का भी प्रकोप बढ़ा


सार

कानपुर सहित आसपास के जिलों में डेंगू और वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। हर रोज बच्चों की मौतें हो रही हैं।

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कानपुर में डेंगू और वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या अस्पताल में बढ़ गई है। शुक्रवार को डेंगू के चार और मरीज मिले। वहीं, बुखार से दो की मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में डेंगू की कंफमेट्री जांच न होने के कारण सैकड़ों मरीज निजी पैथोलॉजी में महंगी जांच कराने के लिए मजबूर हैं। 

बिंदकी (फतेहपुर) निवासी हरिकेश अग्रवाल के आठ वर्षीय बेटे कार्तिक को एक हफ्ते से बुखार आ रहा है। परिजन घर में ही इलाज करा रहे थे। रात में उसकी हालत बिगड़ी। शुक्रवार भोर पहर परिजन उसे कांशीराम अस्पताल लाए। पिता ने बताया कि कांशीराम में डॉक्टरों ने उसे वायरल न्यूमोनाइटिस होने की आशंका जताई।

हालत गंभीर बताते हुए उसे हैलट रेफर कर दिया। वह बेटे को हैलट ला रहे थे, पर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसी तरह जाजमऊ निवासी शिवेंद्र (53) ने चकेरी के एक अस्पताल में वायरल के साथ किडनी की बीमारी के इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
बाल रोग चिकित्सालय में बुखार से पीड़ित 16 बच्चे भर्ती हुए। डेंगू के भी चार मरीज मिले हैं। इनमें तीन शहर और एक रोगी कन्नौज जिले का है। हैलट ओपीडी, इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग में भी ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

मेडिसिन विभाग में भी बेड कम पड़ने लगे हैं। 10 दिन में डेंगू सहित अन्य तरह के बुखार से पीड़ित करीब 20 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। उधर, मेडिकल कालेज की उपप्राचार्य व मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि संक्रामक बीमारियों का कहर बढ़ता जा रहा है। मरीजों की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है।

वायरल के कई मरीजों में प्लेटलेट्स भी घट रही है
सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि डेंगू के चार और रोगी मिले हैं। नगर में पटकापुर, ग्वालटोली और कल्याणपुर में रोगी मिले हैं। जबकि बाल रोग चिकित्सालय में भर्ती एक बच्चे की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है। कन्नौज से तीमारदार इलाज कराने के लिए लाए हैं। कन्नौज सीएमओ को सूचना दे दी गई है। 

विस्तार

कानपुर में डेंगू और वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या अस्पताल में बढ़ गई है। शुक्रवार को डेंगू के चार और मरीज मिले। वहीं, बुखार से दो की मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में डेंगू की कंफमेट्री जांच न होने के कारण सैकड़ों मरीज निजी पैथोलॉजी में महंगी जांच कराने के लिए मजबूर हैं। 

बिंदकी (फतेहपुर) निवासी हरिकेश अग्रवाल के आठ वर्षीय बेटे कार्तिक को एक हफ्ते से बुखार आ रहा है। परिजन घर में ही इलाज करा रहे थे। रात में उसकी हालत बिगड़ी। शुक्रवार भोर पहर परिजन उसे कांशीराम अस्पताल लाए। पिता ने बताया कि कांशीराम में डॉक्टरों ने उसे वायरल न्यूमोनाइटिस होने की आशंका जताई।

हालत गंभीर बताते हुए उसे हैलट रेफर कर दिया। वह बेटे को हैलट ला रहे थे, पर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसी तरह जाजमऊ निवासी शिवेंद्र (53) ने चकेरी के एक अस्पताल में वायरल के साथ किडनी की बीमारी के इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।



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