Published On: Tue, Aug 17th, 2021

केयर्न विवाद में भारत सरकार ने उठाया ये कदम, 1.2 अरब डॉलर दावे का है मामला


भारत सरकार ने वाशिंगटन की एक संघीय अदालत से ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के मुकदमे को खारिज करने को कहा है। इस मुकदमे में मध्यस्थता न्यायाधिकरण के कंपनी को 1.2 अरब डॉलर का भुगतान करने का आदेश लागू करने की मांग की गई है। भारत सरकार ने कहा कि उसे अमेरिकी कानून के तहत संप्रभु छूट है।

केयर्न ने मई में एक अमेरिकी संघीय अदालत से कहा था कि वह मध्यस्थता न्यायाधिकरण के एयर इंडिया को उसे 1.26 अरब डॉलर देने के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य करे। न्यायाधिकरण ने दिसंबर, 2020 में केयर्न के पक्ष में यह आदेश दिया था। सरकार ने 13 अगस्त को डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की अमेरिकी जिला अदालत में एक ‘मोशन टू डिसमिस’ याचिका दायर की, जिसमें कहा कि केयर्न और भारतीय कर प्राधिकरण के बीच विवाद उसके न्यायाधिकार क्षेत्र में नहीं आता। 

सरकार ने निरस्त कर दिया है प्रावधान: बता दें कि भारत की संसद ने इस महीने की शुरुआत में एक संशोधन कानून पारित कर 2012 के पूर्व तिथि से कर लगाने संबंधी कानून के प्रावधान को निरस्त कर दिया। इस कानून के तहत सरकार को 50 साल पुराने मामले में भी कर लगाने की ताकत दी गई थी। ऐसे मामले जहां विदेशों में बैठकर कंपनियों के मालिकाना हक में बदलाव हुआ और पूंजीगत लाभ की प्राप्त हुई लेकिन ऐसी कंपनियों का ज्यादातर कारोबार भारत में था।

वर्ष 2012 के इस कानून का इस्तेमाल केयर्न एनर्जी पर 10,247 करोड़ रुपए सहित 17 कंपनियों पर कुल मिलाकर 1.10 लाख करोड़ रुपए का कर लगाने के लिये किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि ऐसी कर मांगों को वापस लेने के लिए नियम बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

आयकर विभाग ने केयर्न की उसकी पूर्व भारतीय इकाई में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेच दिया, उसके 1,140 करोड़ रुपए के लाभांश को भी जब्त कर लिया। साथ ही 1,590 करोड़ रुपए के कर रिफंड को भी रोक लिया गया था। केयर्न ने मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में चुनौती दी जिसने पिछले साल दिसंबर में सरकार के कदम को गलत करार दिया और पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया।

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सरकार के मध्यस्थता अदालतों के फैसले को मानने से इनकार करने के बाद केयर्न ने विदेशों में स्थित भारतीय संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी करनी शुरू कर दी थी। ताकि वह अपनी राशि वसूल कर सके। मई में उसने एयर इंडिया को अमेरिका की अदालत में घसीटा जबकि पिछले महीने भारत सरकार की रियल एस्टेट संपत्ति को जब्त करने को लेकर फ्रांस की अदालत से आदेश हासिल कर लिया।



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