Published On: Wed, Aug 25th, 2021

क्या यही है Vodafone Idea का अंत? यूजर्स, Jio, Airtel और BSNL पर पड़ेगा क्या असर, समझे 6 प्वाइंट्स में


नई दिल्ली। आइडिया के साथ मर्जर के बाद भारत में Vodafone-Idea सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई थी। लेकिन वोडाफोन-आइडिया आज 270 मिलियन यूजर्स के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पिछले कुछ महीने इस टेलिकॉम कंपनी के लिए बेहद की कठिन और चुनौतीपूर्ण रहे। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2021 में, Vodafone-Idea ने अपने सबसे ज्यादा ग्राहक जो 42,89,519 थे, खो दिए। इसका मुख्य कारण वित्तीय संकट है जिसका सामना अभी कंपनी कर रही है।

हालांकि, जहां एक तरफ वित्तीय संकट कंपनी के लिए एक बड़ी परेशानी है। वहीं, दिवालिया हो जाना यूजर्स समेत पूरे टेलिकॉम क्षेत्र के लिए उतना ही कठिन साबित होगा। यह यूजर्स के लिए इसलिए एक परेशानी भरा समय हो सकता है क्योंकि इन सब संकटों के चलते वॉयस और डाटा दोनों के लिए मौजूद सस्ते प्लान्स को खत्म किया जा सकता है। भारत में मोबाइल यूजर्स के लिए Vodafone-Idea का विफल होना एक बुरी खबर साबित हो सकती है। तो चलिए जानते हैं इसका मुख्य कारण।

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Vodafone से Jio और Airtel में ग्राहकों माइग्रेट होने से कंपनियों के नेटवर्क पर पड़ेगा दबाव
अगर Vodafone दिवालियेपन के लिए फाइल करता है तो लोग Jio और Airtel में माइग्रेट करेंगे जिसके चलते काफी परेशानी भरी स्थिति देखने को मिल सकती है। लाखों ग्राहकों की अचानक आमद इन कंपनियों के लिए नेटवर्क क्षमता से संबंधित मामलों को पैदा कर सकती है। साथ ही नेटवर्क पर काफी दबाव भी पड़ सकता है।

Vodafone के पतन से भारतीय दूरसंचार बाजार में एकाधिकार की स्थिति:
Vodafone के पतन का मतलब है कि भारत के दूरसंचार बाजार में एकाधिकार की स्थिति आ सकती है। केवल रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के पास ही सारा मार्केट होगा। बीएसएनएल-एमटीएनएल वर्षों से एक सीमा के अंदर ही देखे गए हैं तो यह कहना भी सही है कि इसमें इन दोनों कंपनियों का ज्यादा कुछ फायाद नहीं हो सकता है। एकाधिकार एक ऐसी स्थिति है जहां दो कंपनियां एक साथ सभी या ज्यादातर मार्केट शेयर की हिस्सेदार होती हैं। कंपनियों के लिए तो यह अच्छा है लेकिन ग्राहकों के लिए इसे अच्छा नहीं कहा जा सकता है।

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वोडाफोन का अंत तकनीकी प्रगति में बाधा होगा और सर्विस क्वालिटी को प्रभावित करेगा
वोडाफोन कंपनी अगर खत्म होती है तो इसका मतलब यह है कि टेलिकॉम इंफ्रास्टक्चर को बनाए रखने के लिए लागत को तीन के बाज दो कंपनियों एयरटेल और जियो के बीच शेयर करना होगा। यह दोनों के लिए ऑपरेशन कॉस्ट की लागत में बढ़ोतरी करेगा। इससे दोनों कंपनियों पर भार बढ़ेगा और हो सकता है कि सर्विस क्वालिटी प्रभावित हो जो यूजर्स के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं होगा।

ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी से बढ़ सकती है मोबाइल टैरिफ की कीमत:
टेलीकॉम सेक्टर पहले से ही काफी आर्थिक दबाव में है। सभी कंपनियों पर वित्तीय परेशानियां तो है हीं। पिछले कुछ वर्षों में, ARPUS वास्तव में काफी नीचे आ गया है। दूरसंचार कंपनियां इससे पहले से ही काफी परेशान हैं। आसे में दूरसंचार कंपनियां अब ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी को वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। इसका मतलब है कि लागत में किसी भी तरह की वृद्धि को आखिर में यूजर्स को ही झेलनी पड़ेगी। क्योंकि कॉस्ट निकालने के लिए कंपनियां मोबाइल बिल्स को महंगा कर देंगी।

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5G लॉन्च में हो सकती है देरी:
5G नेटवर्क के लॉन्च के लिए टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा पैसों की जरूरत है जिसके चलते इसके लॉन्च की सीमा आगे बढ़ सकती है। अगर वोडाफोन कंपनी बंद हो जाती है तो दोनों कंपनियों के लिए यूजर्स की अचानक वृद्धि उनके मौजूदा नेटवर्क पर ज्यादा बोझ डाल देगी। ऐसे में कंपनियों के पास अपग्रेड करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा मतलब यह हो सकता है कि 5G के लिए जो फंड जमा किए गए हैं उसे डायवर्ट करना होगा।

रिलायंस जियो 2जी ग्राहकों के लिए नहीं है तैयार:
जियो कंपनी अभी 2G यूजर्स के लिए तैयार नहीं है। इसका मतलब है कि अगर उपरोक्त स्थिति आती है तो 2G यूजर्स को ज्यादा भुगतान करना होगा या नया 4G फोन खरीदना होगा। Vodafone Idea के अब भी कई मिलियन सब्सक्राइबर्स 2G नेटवर्क पर हैं। अगर कंपनी वित्तीय संकटों से खुद को बंद करने का फैसला लेती है तो इन यूजर्स को दूसरी टेलिकॉम ऑपरेटरों पर स्विच करते समय ज्यादा बिल या नया 4G फोन खरीदने की जरूरत होगी जो आखिर में यूजर्स पर ही असर डालेगा और उन्हीं पर बोझ बढ़ जाएगा।



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