Published On: Mon, Sep 13th, 2021

जिस नीतीश कुमार को फूटी आंख नहीं सुहाते चिराग पासवान, उसे BJP ने बताया NDA का हिस्सा


पटना
बिहार की राजनीति में कब क्या होगा इस बात का अनुमान लगाना किसी भी राजनीतिक पंडित के लिए आसान नहीं होता है। एक तरफ जहां बिहार में एनडीए के चेहरा सीएम नीतीश कुमार को एलजेपी सांसद चिराग पासवान फूटी आंख नहीं सुहाते हैं, वहीं गठबंधन के अन्य घटक दल बीजेपी ने उन्हें इसी गठबंधन का हिस्सा बताया है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान ने खुद को एनडीए से अलग कर लिया था और इस गठबंधन के प्रमुख घटक दल जेडीयू के खिलाफ प्रत्याशी उतारकर उन्हें काफी डैमेज किया था। वहीं बीजेपी नेता और बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार बबलू ने सोमवार को कहा कि चिराग पासवान एनडीए में थे रहेंगे और बने रहेंगे।

सहयोग कार्यक्रम में जनता की समस्याओं से रू-ब-रू होने के बाद मंत्री नीरज कुमार ‘बबलू’ से पत्रकारों ने पूछा कि रामविलास पासवान की पहली बरसी में सीएम नीतीश कुमार क्यों नहीं शामिल हुए। जबकि बीजेपी, आरजेडी समेत अन्य दूसरे दलों के नेता इस कार्यक्रम में मौजूद थे। इसपर नीरज कुमार बबलू ने कहा कि किसी भी नेता का किसी दूसरे दल के नेता के साथ निजी संबंध रखने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। तेजस्वी यादव से चिराग की मुलाकात पर उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का किसी से नजदीकियां बढ़ना घटना स्वभाविक बात है। लेकिन चिराग पासवान एनडीए का हिस्सा हैं और आगे भी रहेंगे।

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चिराग से बेहद खफा हैं नीतीश
बिहार विधानसभा चुनाव में एलजेपी की ओर से जेडीयू को पहुंचाए गए नुकसान और चिराग पासवान की ओर से नीतीश कुमार पर किए गए निजी हमलों के चलते दोनों दलों के बीच रिश्ते काफी खराब हो चुके हैं। नाराजगी में आकर नीतीश कुमार ने एलजेपी के एकमात्र विधायक को जेडीयू में शामिल करा लिया। इतना ही नहीं ये भी माना जाता है कि पशुपति कुमार पारस की अगुवाई में पांच सांसदों की बगावत कराकर चिराग पासवान को एलजेपी के अध्यक्ष पद से बेदखल करवा दिया है।

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माना जाता है कि नीतीश कुमार इतने भर से नहीं रुके। उन्होंने पीएम मोदी से बात करके चिराग की इच्छा के विरुद्ध जाकर पशुपति कुमार पारस को केंद्र में भी मंत्री भी बनवाया है। इसके बाद रामविलास पासवान की पहली बरसी में शामिल नहीं होकर नीतीश कुमार ने साफ संदेश दे दिया है कि वह चिराग पासवान से किस हद तक नाराज हैं।

टेक्निकली NDA में ही हैं चिराग पासवान
बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त जब चिराग पासवान ने एलजेपी के एनडीए से अलग होने की घोषणा की थी तब उन्होंने कहा था कि वह बिहार में केवल गठधंन से अलग हुए हैं, केंद्र में पहले जैसी स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद चिराग पासवान ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था। चिराग पासवान के खिलाफ एलजेपी में चाचा पशुपति कुमार पारस समेत पांच सांसदों ने बगावत शुरू की तब बीजेपी ने चिराग का साथ नहीं दिया। उल्टा पशुपति कुमार पारस का साथ दिया। इसके बाद से चिराग पासवान और बीजेपी में अच्छे रिश्ते की गुंजाइश बची रहे ऐसा मुश्किल ही दिखता है।

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टेक्निकली देखें तो चिराग पासवान एनडीए का ही हिस्सा हैं। क्योंकि चिराग के चाचा केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और एलजेपी के पांच सांसदों का मोदी सरकार को सपोर्ट है। वहीं इतने विवाद के बाद भी चाचा पशुपति पारस ने चिराग को एलजेपी से निष्कासि नहीं किया है। ऐसे में अगर एलजेपी एनडीए का हिस्सा है तो स्वभाविक है कि चिराग भी इसी संगठन का हिस्सा हुए।

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चिराग का बैक कर क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी?

पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को 43 सीटों के साथ तीसरे नंबर की पार्टी बनने के बाद से 74 विधायक जिताने वाली बीजेपी सीएम नीतीश कुमार पर दबाव बनाने की कोशिश में है। इस वक्त बिहार में बीजेपी और जेडीयू एक ही गठबंधन में होने के बावजूद अपने-अपने हिसाब से संगठन की ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। नीतीश कुमार 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू को बीजेपी के समतुल्य एक बार फिर से ताकतवर बनाने के लिए फैसले ले रहे हैं। चिराग पासवान भी आरजेडी की ओर से लगातार ऑफर मिलने पर भी अपने स्टैंड पर बने हुए हैं। ऐसे में यह दिलचस्प बात है कि बीजेपी चिराग पासवान को बैक कर बिहार की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं।



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