Published On: Sat, Aug 14th, 2021

प्रशासकों के खर्च ब्यौरा सही या गलत, जांच नहीं, कमिश्नर नाराज


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अमरोहा। प्रशासकों ने ग्राम पंचायतों में कार्यकाल के दौरान सही तरीके से रुपये खर्च किए हैं या गलत। इसकी जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्हें शिकायत मिली थी कि एडीओ पंचायतों ने ग्राम पंचायतों में खर्च के नाम पर अनियमितता बरती है। कमिश्नर ने 27 अगस्त तक जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मोहलत दी है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों का स्थलीय और अभिलेख के साथ मिलान करा लिया जाए। गड़बड़ी पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी करें। कमिश्नर के फरमान से एडीओ पंचायतों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि इन लोगों के कार्यकाल में रुपये खर्च किए गए हैं।
जिले में 597 ग्राम पंचायत हैं। ऐसे में 26 दिसंबर 2020 से ग्राम पंचायतों में प्रशासक नामित कर दिए गए हैं। एडीओ पंचायतों ने रकम खर्च करने में नियमों की अनदेखी की। अधिकांश लेन देन 31 मार्च तक पूरे कर लिए गए हैं। इसके बाद कई लोगों ने कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह से शिकायत की। शिकायत के बाद पंचायती राज विभाग हरकत में आया। पांच और 10 लाख रुपये से अधिक खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों की सूची तैयार तो कर ली लेकिन जांच नहीं की। इसके चलते वित्तीय अनियमितता के आरोप की आशंका बढ़ गई है। कमिश्नर ने कहा है कि ई ग्राम स्वराज की वेबसाइट से कार्यों की प्रिंट आउट निकालें। उसके बाद जांच टीम गठित कर स्थलीय और अभिलेखों से मिलान कर लें।

अमरोहा। प्रशासकों ने ग्राम पंचायतों में कार्यकाल के दौरान सही तरीके से रुपये खर्च किए हैं या गलत। इसकी जांच रिपोर्ट नहीं मिलने पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने नाराजगी जताई है। उन्हें शिकायत मिली थी कि एडीओ पंचायतों ने ग्राम पंचायतों में खर्च के नाम पर अनियमितता बरती है। कमिश्नर ने 27 अगस्त तक जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मोहलत दी है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों का स्थलीय और अभिलेख के साथ मिलान करा लिया जाए। गड़बड़ी पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी करें। कमिश्नर के फरमान से एडीओ पंचायतों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि इन लोगों के कार्यकाल में रुपये खर्च किए गए हैं।

जिले में 597 ग्राम पंचायत हैं। ऐसे में 26 दिसंबर 2020 से ग्राम पंचायतों में प्रशासक नामित कर दिए गए हैं। एडीओ पंचायतों ने रकम खर्च करने में नियमों की अनदेखी की। अधिकांश लेन देन 31 मार्च तक पूरे कर लिए गए हैं। इसके बाद कई लोगों ने कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह से शिकायत की। शिकायत के बाद पंचायती राज विभाग हरकत में आया। पांच और 10 लाख रुपये से अधिक खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों की सूची तैयार तो कर ली लेकिन जांच नहीं की। इसके चलते वित्तीय अनियमितता के आरोप की आशंका बढ़ गई है। कमिश्नर ने कहा है कि ई ग्राम स्वराज की वेबसाइट से कार्यों की प्रिंट आउट निकालें। उसके बाद जांच टीम गठित कर स्थलीय और अभिलेखों से मिलान कर लें।



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