Published On: Sat, Jul 24th, 2021

बिहार: जाति आधारित जनगणना पर सीएम नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, बोले- इससे ज्यादा मिलेगा योजनाओं का लाभ


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 24 Jul 2021 01:29 PM IST

सार

बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने की मांग एक बार फिर से उठने लगी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर अपना बयान दिया है। सीएम ने कहा कि उस जाति की बेहतरी की दिशा में और बेहतर काम हो सकता है।

जाति आधारित जनगणना पर नीतीश कुमार का बयान
– फोटो : ANI

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना कराने को एक बार फिर समर्थन किया है। नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने पहले ही सदन में इस पर अपना विचार रख चुके हैं।  फरवरी 2019 और 2020 में जाति आधारित जनगणना के बारे में विधानसभा में सरकार अपनी सोच रख चुकी है। 
 

जाति आधारित जनगणना एक बार जरूर होनी चाहिए- नीतीश कुमार
पटना में सीएनजी बसों को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश ने ट्वीट “हम लोगों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। बिहार विधान मंडल ने 18 फरवरी 2019 एवं पुनः 27 फरवरी 2020 को सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित किया था और इस प्रस्ताव को केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती- गौस
वहीं प्रदेश जदयू उपाध्यक्ष व बिहार विधान परिषद के सदस्य प्रो. गुलाम गौस ने भी केंद्र सरकार से जातीय जनगणना की उपेक्षा नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे जनता में गलत संदेश जाएगा। पिछड़ी जातियों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। गौस ने कहा कि अगर देश में किन्नरों की जनगणना हो सकती है तो पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती है। 

तेजस्वी यादव ने केंद्र पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी राज्य में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया। तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साघते हुए कहा कि भाजपा को पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या पता नहीं चलेगी तब तक उनके फायदे की योजनाएं कैसे बनेगी। 

विस्तार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना कराने को एक बार फिर समर्थन किया है। नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने पहले ही सदन में इस पर अपना विचार रख चुके हैं।  फरवरी 2019 और 2020 में जाति आधारित जनगणना के बारे में विधानसभा में सरकार अपनी सोच रख चुकी है। 

 

जाति आधारित जनगणना एक बार जरूर होनी चाहिए- नीतीश कुमार

पटना में सीएनजी बसों को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश ने ट्वीट “हम लोगों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। बिहार विधान मंडल ने 18 फरवरी 2019 एवं पुनः 27 फरवरी 2020 को सर्वसम्मति से इस आशय का प्रस्ताव पारित किया था और इस प्रस्ताव को केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केन्द्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती- गौस

वहीं प्रदेश जदयू उपाध्यक्ष व बिहार विधान परिषद के सदस्य प्रो. गुलाम गौस ने भी केंद्र सरकार से जातीय जनगणना की उपेक्षा नहीं करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे जनता में गलत संदेश जाएगा। पिछड़ी जातियों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। गौस ने कहा कि अगर देश में किन्नरों की जनगणना हो सकती है तो पिछड़ों की गिनती क्यों नहीं हो सकती है। 

तेजस्वी यादव ने केंद्र पर साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी राज्य में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया। तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साघते हुए कहा कि भाजपा को पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों से इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या पता नहीं चलेगी तब तक उनके फायदे की योजनाएं कैसे बनेगी। 





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