Published On: Thu, Jul 30th, 2020

भारत ने दिए बांग्लादेश को 4 डीजल रेल इंजिन, 6 और दिए जाएंगे


(Bihar News ) भारत पड़ौसी देशों से सौहार्दपूर्ण संबंध (Indo-Bangladesh ) बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पड़ोसी बांग्लादेश की परिवहन व्यवस्था (Support to transport system ) में योगदान देने के लिए 10 डीजल रेल इंजिन सौंपने की प्रक्रिया शुरु की गई है। इनमें से 4 इंजिन बांग्लादेश को सुपुर्द किए जा चुके हैं। इनमें 6 डीजल इंजिन समस्तीपुर रेलमंडल से और विशाखापट्टनम मंडल तथा ईस्टर्न रेलवे से 2-2 दिए जाएंगे।

समस्तीपुर(बिहार): (Bihar News ) भारत पड़ौसी देशों से सौहार्दपूर्ण संबंध (Indo-Bangladesh ) बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पड़ोसी बांग्लादेश की परिवहन व्यवस्था (Support to transport system ) में योगदान देने के लिए 10 डीजल रेल इंजिन सौंपने की प्रक्रिया शुरु की गई है। इनमें से 4 इंजिन बांग्लादेश को सुपुर्द किए जा चुके हैं। इनमें 6 डीजल इंजिन समस्तीपुर रेलमंडल से और विशाखापट्टनम मंडल तथा ईस्टर्न रेलवे से 2-2 दिए जाएंगे।

सियालदाह से जाएंगे बांग्लादेश
सभी रेल इंजन डब्लुडीएम 3 मॉडल के एल्को वर्जन के हैं। इसके अलावा इनकी क्षमता 33 हजार हार्स पावर की होती है। जिससे यह काफी कारगर साबित होता है। इन रेल इंजनों का उपयोग पहले रेल मंडल अपने यहां मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में करता था। औसतन 7 से लेकर 10 साल तक इन इंजनों का उपयोग ट्रेनों के परिचालन में किया जा चुका है। समस्तीपुर रेल मंडल की ओर से इन इंजनों को विगत दिनों सियालदह शेड भेजा गया है। जहां से इसे बंगलादेश भेजा जायेगा। शेष इंजनों को भी सियालदह शेड ही भेजा गया है। जहां इसे इसकी आगे की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

2022 तक टैग
रेलवे ने दिसंबर 2022 तक अपने सभी डिब्बों में आरएफआईडी टैग लगाने की योजना बनाई है। जिसके माध्यम से रेल डिब्बे जहां कहीं भी हों उनका पता लगाया जा सकता है। रेलवे की ओर से रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग प्रणाली का उपयोग कर डिब्बों की निगारानी का काम शुरू किया है। समस्तीपुर रेलवे स्टेशन व रेल पटरियों पर लगे उपकरण के सहारे 2 मीटर की दूरी से ही कोच की पहचान हो जाएगी। अभी जहां पूरी कागजी प्रणाली के सहारे ही डब्बों की निगरानी होती है। वहीं जीपीएस की मदद से इस तकनीक के सहारे बेहतर निगरानी प्रणाली स्थापित की जा सकेगी।

टैग से डिब्बों की जानकारी
आरएफआईडी टैग प्रणाली शुरू हो जाने से माल डिब्बों, यात्री डिब्बों और इंजंनों की कमी की समस्या को तेजी के साथ अधिक पारदर्शी तरीके से सुलझाने में मदद मिल सकेगी। इसे कारगर बनाने के लिये उपकरण रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के पास प्रमुख स्थानों पर लगाए जायेंगे जो डिब्बो पर लगे टैग को दो मीटर की दूरी से ही पढ़ लेंगे और डिब्बे की पहचान कर उससे संबंधित आंकड़ों को केन्द्रीय कंप्यूटरीकृत प्रणाली तक पहुंचा देंगे। इससे प्रत्येक डिब्बे की पहचान की जा सकेगी और वह डिब्बा जहां कहीं भी होगा उसका पता लगाया जा सकेगा। वर्तमान में भारतीय रेलवे अपने सभी रेल डिब्बों की जानकारी लिखित रूप में रखती है जिसमें त्रुटियों की काफी गुंजाइश बनी रहती है। ऐसे में रेलवे के लिए आरएफआईडी टैग से अपने सभी डिब्बों और इंजनों की सही स्थिति जानना आसान हो जाएगा।






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