Published On: Sun, Aug 9th, 2020

‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौसलों में जान होती है,’


‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके हौसलों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौंसलों से ही उड़ान होती है।,’ (Dr.Abdul Kalam ) पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम कहा करते थे कि बड़े सपने देखने (Big dreamer ) चाहिए। (UPSC ) गांव में रहकर जहां आसानी से ना बिजली आती है, इंटरनेट की स्पीड़ भी आती-जाती रहती है। (IAS ) डॉ. कलाम के संदेश को प्रमाणित करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा में झंडा गाढ़ दिया।

समस्तीपुर(बिहार): ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है,

जिनके हौसलों में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता,

हौंसलों से ही उड़ान होती है।,’

(Dr.Abdul Kalam ) पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम कहा करते थे कि बड़े सपने देखने (Big dreamer ) चाहिए। (UPSC ) गांव में रहकर जहां आसानी से ना बिजली आती है, इंटरनेट की स्पीड़ भी आती-जाती रहती है। ऐसी चुनौतियों और पृष्ठभूमि के बीच एक युवा ने देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा (IAS ) में जाने का बड़ा सपना देखा। इतना ही नहीं इस सपने को पूरा करने के लिए हजारों रूपयों की नौकरी तक छोड़ दी और गांव चला आया। आखिरकार डॉ. कलाम के जोशिले और प्रेरणादायक संदेश को प्रमाणित करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा में झंडा गाढ़ दिया।

उत्साही व दृढ़निश्चय
यह उत्साही और दृढ़निश्चय वाला युवा है समस्तीपुर जिले से तीन किलोमीटर दूर धुरलक गांव राहुल मिश्रा। राहुल ने संघ लोक सेवा आयोग की 2019 सिविल सेवा परीक्षा में 202 वीं रैंक हासिल की है। राहुल की इस उपलब्धि से पूरे गांव में हर्ष का माहौल है। सभी गांववासी आश्चर्यचकित भी हैं कि आखिर कैसे कोई गांव में तैयारी करके भी आईएएस बन सकता है, इसके विपरीत इस परीक्षा के ज्यादातर प्रत्याशी न सिर्फ शहरों में रहते हैं बल्कि कोंचिंगों को सहारा लेते हैं। इसके विपरीत राहुल का गांव में रहकर ही आईएएस में चयन हो गया।

202 वी रैंक
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2019 का परिणाम जारी हो चुका है। सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम बिहार के लिए खास होता है। हर साल की तरह इस साल भी बिहार के कई छात्र-छात्राओं ने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। ऐसे ही एक छात्र राहुल मिश्रा शहर से तीन किलोमीटर दूर एक गांव के रहने वाले राहुल की इस कामयाबी पर पूरा गांव जश्न मना रहा है। राहुल मिश्रा ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 में 202 वीं रैंक हासिल की है। राहुल मिश्रा का यह दूसरा प्रयास था।

पिता हैं शिक्षक
समस्तीपुर जिले से तीन किलोमीटर दूर धुरलक गांव निवासी शिक्षक बिपिन मिश्रा का बड़ा बेटा राहुल मिश्रा आईएएस बना गया है। राहुल मिश्रा के मुताबिक वह अपने पिता के सानिध्य में ही यूपीएससी की तैयारी की है। राहुल आईआईटी से इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। युपीएससी तैयारी शुरू करने से पहले वह छह महीने तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी कर चुके हैं।

पिता का सहयोग व कड़ी मेहनत
अपनी सफलता पर राहुल का कहना है कि इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। इसमें उनके पिता का भी काफी सहयोग मिला है। इंटरनेट की मदद ली और इस पूरे अध्ययन के दौरान इनके पिता ने इनका भरपूर सहयोग किया। मैं चाहता था कि रैंक अच्छी मिलेगी, लेकिन थोड़ी निराशा है। हम आगे भी एक-दो प्रयास और करेंगे ताकि रैंक अच्छी मिले।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता
आखिरकार यूपीएससी की दूसरी बार परीक्षा में वह पास कर गए। राहुल के इस उपलब्धि से पूरा गांव गदगद है। राहुल के दोस्तों, उनके भाई छोटे भाई और पिता का कहना है कि वह बचपन से पढऩे में तेज थे। उनके कठिन परिश्रम का ही ये परिणाम है। राहुल की दादी भी अपने पोते की इस सफलता पर फक्र महसूस कर रही हैं।

गांव में किया कारनामा
राहुल के पिता का कहना है कि राहुल दृढ़ इच्छा शक्ति और सच्ची लगन से इस कामयाबी हो हासिल किया है। गांव के वातावरण में रहकर ही राहुल ने ये कारनामा किया है। यूपीएससी परीक्षा के लिए छात्र अक्सर बड़े-बड़े संस्थानों और शहरों में जाकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन राहुल ने गांव से ही पढ़ाई की है।

आईएएस के लिए छोड़ी नौकरी
इस सफलता से राहुल की पूरे जिले में चर्चा हो रही है। राहुल मिश्रा की प्रारंभिक पढ़ाई समस्तीपुर से ही हुई है। राहुल ने वर्ष 2016 में बीएचयू से आईआईटी कंप्लीट किया और एमएनसी कंपनी में 6 महीने तक काम किया। मन में सिविल सर्विसेस की इच्छा पाले राहुल ने नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। उन्होंने अपने पैतृक गांव में रहकर तैयारी शुरू की, जहां इनके पिता ने भी काफी सहयोग दिया। पहली बार उन्हें सफलता नही मिली, लेकिन बिना हतास हुए वो लगातार तैयारी में जुटे रहे।
















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