Published On: Sun, Jul 12th, 2020

मधुश्रावणी व्रत शुरू, नव विवाहिताओं ने की शिव-पार्वती की पूजा


हाइलाइट्स

  • सावन मास में चौदह दिनों तक चलने वाला नवविवाहिता का कठिन व्रत मधुश्रावणी पूरे मिथिलांचल में शुरू।
  • सभी जगहों पर नवविवाहिताएं फूल लेकर पूजा अर्चना में जुटी।
  • मधुश्रावणी में भगवान शंकर और पार्वती की आराधना की जाती है।

मधेपुरा
सावन मास में चौदह दिनों तक चलने वाला नवविवाहिता का कठिन व्रत मधुश्रावणी ग्वालपाड़ा प्रखंड समेत पूरे मिथिलांचल में शुरू हो गया है। जिले में भी मधुश्रावणी पर्व की धूम मची हुई है। सभी जगहों पर नवविवाहिताएं फूल लेकर पूजा अर्चना में जुटी हुई हैं। मिथिलांचल में नवविवाहिताओं द्वारा मनाए जाने वाले लोकपर्व मधुश्रावणी में भगवान शंकर और पार्वती की आराधना की जाती है।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से शुरू होता है ये पर्व
यह पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से चंद्रमा, विषहारा एवं शिव-पार्वती पूजा से शुरू होती है एवं सावन माह के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को संपन्न होती है। इस बार यह पर्व 10 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई को संपन्न होगी। यह पर्व नवविवाहिता पति के दीर्घायु एवं अमर सुहाग के लिए मनाती है।

भगवान शंकर और पार्वती की आराधना की जाती है
मधुश्रावणी मैथिल ब्राह्मण द्वारा विशेष रूप से पूजा जाता है। इसमें एक व्रती पूरी निष्ठा के साथ उपवास करते हुए भगवान शंकर और पार्वती की आराधना-पूजा करती है। इसके लिए सभी पूजन सामग्री वर पक्ष की ओर से मुहैया करने का विधान है। अंतिम दिन सुहागिन महिलाओं के बीच सुहाग किट का वितरण किया जाता है। लॉकडाउन के कारण अभी कम भीड़ देखी जा रही है



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