यूपी चुनावः जिला पंचायत सदस्यों को ट्रंप कार्ड की तरह इस्तेमाल करेंगी मायावती, बीएसपी का ये है प्लान


सुमित शर्मा, कानपुर
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बीएसपी के जिला पंचायत और बीडीसी सदस्यों ने जीत दर्ज की थी। बीएसपी सुप्रीमो मायावती के लिए ये जिला पंचायत और बीडीसी सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में संजीवनी का काम करेंगे। मायावती इनका इस्तेमाल ट्रंप कार्ड की तरह करेंगी। बीएसपी ने बीजेपी और एसपी को घेरने के लिए नई रणनीति तैयार की है। बीएसपी के प्रबुद्ध वर्ग गोष्ठी (ब्राह्मण सम्मेलन) से विपक्ष पहले ही परेशान है।

बीएसपी में मायावती के अलावा कोई भी बड़ा चेहरा नहीं है। कहा जाता है कि मायावती के अड़ियल रवैये की वजह से कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। वहीं कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को बीएसपी सुप्रीमो ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। पंचायत चुनाव के बाद बीएसपी को विधानसभा चुनाव में सबसे कमजोर पार्टी माना जा रहा था। उनके पास सतीश चंद्र मिश्र, एमएलसी भीमराव अम्बेडकर, नौशाद अली समेत कम ही बड़े नेता बचे हैं। विधानसभा चुनाव की लड़ाई में कमजोर घोषित की जा चुकीं मायावती ने ब्राह्मण कार्ड चलकर विपक्षी पार्टियों को चारों खाने चित्त कर दिया।

बीएसपी करेगी जिला पंचायत सदस्यों का इस्तेमाल

यूपी पंचायत चुनाव 2021 में बीएसपी समर्थित जिला पंचायत और बीडीसी सदस्य जीते थे लेकिन बीएसपी ने जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनावों में हिस्सा नहीं लिया था। बीएसपी जीते हुए जिला पंचायत और बीडीसी सदस्यों का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में करने जा रही है। जीते हुए जिला पंचायत और बीडीसी सदस्य अपने क्षेत्रों में पार्टी के लिए एक बडे़ कैंपेन की शुरुआत करने जा रहे हैं।

भाईचारे का देंगे संदेश
इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करना होगा। जिला पंचायत सदस्य घर-घर जाकर वोटरों को बहुजन भाईचारे का पाठ पढ़ाएंगे। बहनजी के शासन काल की याद दिलाएंगे। इसके साथ ही ब्राह्मण वोटरों को जोड़ने का काम करेंगे। एसपी और बीजेपी की जन विरोधी नीतियों से वोटरों को अवगत कराएंगे। इसके साथ ही बीएसपी की जिला इकाई के कार्यकर्ता बूथ-बूथ पर जाकर अपना काम करते रहेंगे।

बीएसपी के एक नेता ने बताया कि कानपुर में जिला पंचायत सदस्य की 32 सीटें हैं। इसमें से बीएसपी के 6 सदस्यों ने जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही लगभग 8 ऐसी सीटें थीं, जिसमें हम बहुत ही कम अंतराल से हारे थे। बीजेपी ने सत्ता के बल पर भले ही अपना जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख बना लिए हों लेकिन जमीनी स्तर पर जो हमें वोट मिला है। बीजेपी उसे नहीं बदल सकती। ग्रामीण क्षेत्रों का वोटर अभी भी हमारे साथ खड़ा है। जीते हुए जिला पंचायत और बीडीसी सदस्य और रनर पार्टी के प्रचार प्रसार की कमान संभालेगे।

ग्रामीणों का मिल रहा सहयोग

उन्होने बताया कि हमें ग्रामीणों का बहुत अच्छा सहयोग मिल रहा है। गांव-गांव जाकर हमारे कार्यकर्ता चौपाल लगा रहे हैं। राजनीतिक चर्चा कर हम अपना पक्ष रख रहे हैं। ग्रामीण हमारी बातों को समझ रहे है। इसके साथ ही यह देखने को मिल रहा है कि गांव का किसान और बेरोजगार युवा सरकार से खासा नाराज है। इसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।



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