Published On: Wed, Jun 16th, 2021

लॉकडाउन का असर: संकट में आजमगढ़ का पॉटरी उद्योग, मांग घटने से करोड़ों का नुकसान


हाइलाइट्स

  • जिले में पॉटरी कला की शुरुआत करीब 400 साल पहले आलमगीर के शासनकाल में हुई थी
  • इस उद्योग ने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई है
  • आज भी विदेशों से लोग इस कला को सीखने और यहां के उत्पादों को खरीदने के लिए आते हैं
  • निजामाबाद के दो दर्जन से अधिक कुम्हार अपनी कला के लिए राष्ट्रपति के हाथों से सम्मान पा चुके हैं

आजमगढ़
कोरोना लॉकडाउन के चलते आजमगढ़ जिले के विश्व प्रसिद्ध पॉटरी उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। इस उद्योग से जुड़े लोगों की माने तो अब तक उन्हें करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस कला से जुड़े कुम्हारों और व्यवसायियों का कहना है कि मांग न होने से करोड़ों की कीमत का सामान उनके पास डंप पड़ा है। मटका सहित तमाम बर्तनों की उपयोगिता इस साल लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में या तो उन्हें एक साल तक संभाल कर रखा जाय अथवा कूड़े में फेंका जाय।

400 साल पुराना है इतिहास

जिले में पॉटरी कला की शुरुआत करीब 400 साल पहले आलमगीर के शासनकाल में हुई थी। इस उद्योग ने भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बनायी। आज भी विदेशों से लोग इस कला को सीखने और यहां के उत्पादों को खरीदने के लिए आते है। निजामाबाद के दो दर्जन से अधिक कुम्हार अपनी कला के लिए राष्ट्रपति के हाथों अथवा राज्य दक्षता पुरस्कार से सम्मानित है लेकिन सरकारों ने इस उद्योग की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया। इसके बाद भी यहां के कुम्हारों ने इस कला को जीवंत रखा।

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एक जिल एक उत्पाद से बनी पहचान

वर्ष 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनने के बाद सीएम योगी ने कुम्हारों को न केवल भूमि का आवंटन किया बल्कि इस उद्योग को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल कर संजीवनी देने का काम किया। पिछले वर्ष यहां के कुम्हार सोहित को मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल होने के लिए खुद पीएम ने आमंत्रित किया था। इससे यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा। निजामाबाद के कुम्हार अपने पॉटरी उत्पादों को दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पूना, नागपुर, पंजाब आदि राज्यों में सप्लाई करते हैं। वाराणसी अथवा आजमगढ़ आने वाले पर्यटक भी यहां घूमने और पॉटरी सामानों के खरीदने के लिए पहुंचते रहे है।

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हर महीने एक से डेढ़ करोड़ का कारोबार

यहां के लोग प्रति माह एक से डेढ़ करोड़ का कारोबार करते हैं। मार्च से जून के बीच इनका कारोबार काफी बढ़ जाता है। कारण कि दूसरों राज्यों के लिए भी यहां के कुम्हार आइसक्रीम मटका तैयार करते है। इस मटके से इनका 70 से 75 लाख का कारोबाार सीजन में हो जाता है लेकिन लगातार दूसरे साल कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन का असर इस उद्योग पर पड़ा है। ऑर्डर के हिसाब से कुम्हार केवल 50 लाख का आइसक्रीम मटका तैयार कर चुके है। इसके अलावा करीब 6.5 करोड़ का अन्य सामान भी इन्होंने तैयार कर रखा है लेकिन मटका सहित तमाम सामानों की अब उपयोगिता ही लगभग समाप्त हो गयी है। कारण कि आइसक्रीम आदि का समय अब जाने वाला है। लगन भी समाप्त होने वाली है।

लॉकडाउन के चलते भारी नुकसान

इससे कुम्हार काफी परेशान हैं कि वे तैयार माल का करेंगे क्या। राज्य दक्षता पुरस्कार से सम्मानित सोहित प्रजापति व महेंद्र प्रजापति का कहना है कि लॉकडाउन ने पाटरी उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई है। अब तक कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है। आइसक्रीम मटके की उपयोगिता दो महीनें में पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। फिर इसे बेचने के लिए एक साल प्रतीक्षा करनी होगी। अन्य सामान भी डंप पड़ा है। हमारे पास जो जमा पूंजी थी वह लॉकडाउन के दौरान जरूरतों को पूरा करने में समाप्त हो चुकी है। आगे भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।

लॉकडाउन का असर: संकट में आजमगढ़ का पॉटरी उद्योग, मांग घटने से करोड़ों का नुकसान

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