Published On: Sat, Sep 11th, 2021

हिंदी हैं हम : …क्या हिंदी के बिना कुछ कर पाते हैं


काव्य प्रतियोगिता में उपस्थित छात्र-छात्रा । अमर उजाला
– फोटो : CITY OFFICE

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भारतीय संस्कृति के कण-कण में हिंदी रची-बसी है। यह दिन-प्रतिदिन समृद्ध हो रही है, क्योंकि नई पीढ़ी ने मातृ भाषा को पल्लवित करने का बीड़ा उठा लिया है। अलग-अलग विधाओं में स्वरचित कविताएं सुनाकर कक्षा 9 व 10 छात्र-छात्राओं ने यही संदेश दिया कि मातृ भाषा हिंदी के दिन बहुरेंगे। शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के बैनरतले हिंदी हैं हम अभियान के तहत विश्व भारती पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया। उनका कविता पाठ सुनकर सभागार में मौजूद साथी छात्र-छात्राओं ने उत्साहवर्धन किया।
शुक्रवार को स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने हिंदी का महत्व कविता के माध्यम से बताया। कक्षा 9 की छात्रा अक्षिता सिंह ने –
‘हिंदी दिवस तो हम रोज मनाते हैं, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, बिहारी, हिंदी के ही तो भाग हैं ये, क्या हिंदी के बिना कुछ कर पाते हैं’ सुनाया।
कक्षा 10 की छात्रा अंजलि शर्मा ने अपनी कविता में पेड़ों का महत्व बताया। कहा- ‘जीवन सुखी बनाते पेड़, कर देते हैं दूर प्रदूषण, बाढ़ से हमें बचाते पेड़, चलो चले सब पेड़ लगाएं, हरियाली फैलाते पेड़’।
कक्षा 10 की छात्रा सोनाक्षी ने कविता के माध्यम से जीवन में किताबों की अहमियत बताई। कहा- ‘किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं, किताबों में झरने गुनगुनाते हैं, परियों के किस्से सुनाते हैं, किताबों में साइंस का राज है, किताबों में भूगोल की भरमार है’।
कक्षा 10 की छात्रा प्राची जौहरी ने सांप्रदायिक सद्भाव पर केंद्रित कविता ‘मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर ने बांट लिया भगवान को, धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इंसानों को’ सुनाई।
कक्षा 10 की छात्रा अदिति सिंह ने ‘हम मेहनत वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया, सागर ने रास्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया, फौलादी हैं सीने अपने फौलादी हैं बाहें, हम चाहे तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें’ सुनाया।
कक्षा 10 के छात्र हर्षित गौड़ ने मां पर लिखी कविता ‘यह दुनिया तेरे बेटे को कितना सताती है, मां थे कौन सी दुनिया में खो गई है तू, क्या अब मेरी आवाज तुझ तक नहीं पहुंच पाती है, कसम से मां तेरी बहुत याद आती है’ सुनाई।
इसके अलावा, कक्षा 10 की छात्रा तृप्ति पचौरी ने ‘एक बेटी को जाने हमने कितने ही रूपों में पाया, मां, बेटी, पत्नी, बहन सब चीजों में हैं बड़ी खूबसूरती से है पाया’ सुनाया।
हिंदी हैं हम अभियान में बच्चों को प्रतिभाग करवाने के लिए अमर उजाला को बधाई देती हूं। हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की प्रतीक है। हिंदी को सभी दुलारें और पुचकारें, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है। – सुनीता सिंह, प्रधानाचार्या, विश्व भारती पब्लिक स्कूल
स्कूल में बच्चों ने जिस मनोयोग से कविता पाठ किया है, वह प्रशंसनीय है। बच्चों के जो विचार निकलकर सामने आए, वह निश्चित रूप से उनके मन में उठ रहे विचारों के ज्वार का एक अंश है। – मनोज जादौन, निदेशक, विश्व भारती पब्लिक स्कूल

काव्य प्रतियोगिता में कविता पाठ करती तृप्ति पचौरी।

काव्य प्रतियोगिता में कविता पाठ करती तृप्ति पचौरी।– फोटो : CITY OFFICE

भारतीय संस्कृति के कण-कण में हिंदी रची-बसी है। यह दिन-प्रतिदिन समृद्ध हो रही है, क्योंकि नई पीढ़ी ने मातृ भाषा को पल्लवित करने का बीड़ा उठा लिया है। अलग-अलग विधाओं में स्वरचित कविताएं सुनाकर कक्षा 9 व 10 छात्र-छात्राओं ने यही संदेश दिया कि मातृ भाषा हिंदी के दिन बहुरेंगे। शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के बैनरतले हिंदी हैं हम अभियान के तहत विश्व भारती पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने कविता पाठ किया। उनका कविता पाठ सुनकर सभागार में मौजूद साथी छात्र-छात्राओं ने उत्साहवर्धन किया।

शुक्रवार को स्कूल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने हिंदी का महत्व कविता के माध्यम से बताया। कक्षा 9 की छात्रा अक्षिता सिंह ने –

‘हिंदी दिवस तो हम रोज मनाते हैं, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, बिहारी, हिंदी के ही तो भाग हैं ये, क्या हिंदी के बिना कुछ कर पाते हैं’ सुनाया।

कक्षा 10 की छात्रा अंजलि शर्मा ने अपनी कविता में पेड़ों का महत्व बताया। कहा- ‘जीवन सुखी बनाते पेड़, कर देते हैं दूर प्रदूषण, बाढ़ से हमें बचाते पेड़, चलो चले सब पेड़ लगाएं, हरियाली फैलाते पेड़’।

कक्षा 10 की छात्रा सोनाक्षी ने कविता के माध्यम से जीवन में किताबों की अहमियत बताई। कहा- ‘किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं, किताबों में झरने गुनगुनाते हैं, परियों के किस्से सुनाते हैं, किताबों में साइंस का राज है, किताबों में भूगोल की भरमार है’।

कक्षा 10 की छात्रा प्राची जौहरी ने सांप्रदायिक सद्भाव पर केंद्रित कविता ‘मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर ने बांट लिया भगवान को, धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इंसानों को’ सुनाई।

कक्षा 10 की छात्रा अदिति सिंह ने ‘हम मेहनत वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया, सागर ने रास्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया, फौलादी हैं सीने अपने फौलादी हैं बाहें, हम चाहे तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें’ सुनाया।

कक्षा 10 के छात्र हर्षित गौड़ ने मां पर लिखी कविता ‘यह दुनिया तेरे बेटे को कितना सताती है, मां थे कौन सी दुनिया में खो गई है तू, क्या अब मेरी आवाज तुझ तक नहीं पहुंच पाती है, कसम से मां तेरी बहुत याद आती है’ सुनाई।

इसके अलावा, कक्षा 10 की छात्रा तृप्ति पचौरी ने ‘एक बेटी को जाने हमने कितने ही रूपों में पाया, मां, बेटी, पत्नी, बहन सब चीजों में हैं बड़ी खूबसूरती से है पाया’ सुनाया।

हिंदी हैं हम अभियान में बच्चों को प्रतिभाग करवाने के लिए अमर उजाला को बधाई देती हूं। हिंदी भाषा हमारी संस्कृति की प्रतीक है। हिंदी को सभी दुलारें और पुचकारें, क्योंकि यह हमारी मातृभाषा है। – सुनीता सिंह, प्रधानाचार्या, विश्व भारती पब्लिक स्कूल

स्कूल में बच्चों ने जिस मनोयोग से कविता पाठ किया है, वह प्रशंसनीय है। बच्चों के जो विचार निकलकर सामने आए, वह निश्चित रूप से उनके मन में उठ रहे विचारों के ज्वार का एक अंश है। – मनोज जादौन, निदेशक, विश्व भारती पब्लिक स्कूल

काव्य प्रतियोगिता में कविता पाठ करती तृप्ति पचौरी।

काव्य प्रतियोगिता में कविता पाठ करती तृप्ति पचौरी।– फोटो : CITY OFFICE



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