Published On: Thu, Sep 9th, 2021

1.35 करोड़ से नई बिल्डिंग तैयार, चिकित्सक बिना कैसे होगा इलाज


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अमेठी। शहर स्थित सीएचसी परिसर के नवनिर्मित भवन में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जल्द शुरू हो जाएगा। नए भवन में ओपीडी संचालन होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भले ही थोड़ी सहूलियत मिल जाए, लेकिन चिकित्सक और स्टाफ की कमी से इलाज कैसे मिलेगा इसका जवाब मुश्किल है।
सृजित पदों के आधार पर सीएचसी में आधे स्टाफ की भी तैनाती नहीं है। जिन चिकित्सकों की तैनाती है भी उनकी भी कहीं ट्रनिंग तो कभी कैंप में ड्यूटी लग जाती है। जिससे अकसर मरीजों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है।
शहर स्थित सीएचसी स्थानीय विधानसभा क्षेत्र की सबसे व्यस्त स्वास्थ्य केंद्र है। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए शासन की ओर से इमरजेंसी और ओपीडी भवन का निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड यूनिट सुल्तानपुर द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1.35 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विभाग को नवनिर्मित ओपीडी एवं इमरजेंसी भवन विभाग हैंडओवर भी हो गया है। एक सप्ताह के भीतर नवनिर्मित भवन में ओपीडी और इमरजेंसी का संचालन शुरू हो जाएगा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर इमरजेंसी व ओपीडी का संचालन नवनिर्मित भवन में शुरू हो जाएगा।
मरीजों को सुविधा मिल सके इसके लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से भेजे गए सामानों को नए भवन के कमरों में शिफ्ट कराया जा रहा है। नवनिर्मित भवन में ओपीडी, ऑर्थो, डेंटल, नेत्र तथा एक्स-रे, औषधि भंडार कक्ष, पर्ची व दवा वितरण काउंटर के साथ ही इमरजेंसी संचालित की जाएगी। वार्ड, अल्ट्रासाउंड, ब्लड स्टोरेज यूनिट, ऑपरेशन थिएटर, प्रसव कक्ष आदि का संचालन पुरानी बिल्डिंग में ही होगा।
न पर्याप्त चिकित्सक न ही अन्य स्टाफ
सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि फर्स्ट रेफरल यूनिट केंद्र पर सात चिकित्सकों का स्टाफ होना चाहिए। मौजूदा समय में चार चिकित्सक हैं। इसमें हड्डी विशेषज्ञ डॉ. अमरनाथ की कैंप और अन्य में ड्यूटी लग जाती है। अधीक्षक का प्रभार होने के चलते फील्ड व अन्य कार्यक्रमों में व्यस्तता रहती है।
डेंटल चिकित्सक अंजलि यादव को इमरजेंसी में नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में इमरजेंसी चलाने में काफी समस्या होती है। चार वार्ड ब्वाय पद के सापेक्ष मात्र एक वार्ड ब्वाय हैं। तीन स्वीपर के सापेक्ष मात्र एक स्वीपर है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं
सीएचसी पर एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्टाफ नर्स के भरोसे प्रसव कराया जाता है। ऑन काल एक सर्जन आते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को निजी एवं अन्य चिकित्सालयों में जाना पड़ता है।

अमेठी। शहर स्थित सीएचसी परिसर के नवनिर्मित भवन में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जल्द शुरू हो जाएगा। नए भवन में ओपीडी संचालन होने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भले ही थोड़ी सहूलियत मिल जाए, लेकिन चिकित्सक और स्टाफ की कमी से इलाज कैसे मिलेगा इसका जवाब मुश्किल है।

सृजित पदों के आधार पर सीएचसी में आधे स्टाफ की भी तैनाती नहीं है। जिन चिकित्सकों की तैनाती है भी उनकी भी कहीं ट्रनिंग तो कभी कैंप में ड्यूटी लग जाती है। जिससे अकसर मरीजों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है।

शहर स्थित सीएचसी स्थानीय विधानसभा क्षेत्र की सबसे व्यस्त स्वास्थ्य केंद्र है। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए शासन की ओर से इमरजेंसी और ओपीडी भवन का निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड यूनिट सुल्तानपुर द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1.35 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है।

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विभाग को नवनिर्मित ओपीडी एवं इमरजेंसी भवन विभाग हैंडओवर भी हो गया है। एक सप्ताह के भीतर नवनिर्मित भवन में ओपीडी और इमरजेंसी का संचालन शुरू हो जाएगा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर इमरजेंसी व ओपीडी का संचालन नवनिर्मित भवन में शुरू हो जाएगा।

मरीजों को सुविधा मिल सके इसके लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से भेजे गए सामानों को नए भवन के कमरों में शिफ्ट कराया जा रहा है। नवनिर्मित भवन में ओपीडी, ऑर्थो, डेंटल, नेत्र तथा एक्स-रे, औषधि भंडार कक्ष, पर्ची व दवा वितरण काउंटर के साथ ही इमरजेंसी संचालित की जाएगी। वार्ड, अल्ट्रासाउंड, ब्लड स्टोरेज यूनिट, ऑपरेशन थिएटर, प्रसव कक्ष आदि का संचालन पुरानी बिल्डिंग में ही होगा।

न पर्याप्त चिकित्सक न ही अन्य स्टाफ

सीएचसी अधीक्षक डॉ. सौरभ सिंह ने बताया कि फर्स्ट रेफरल यूनिट केंद्र पर सात चिकित्सकों का स्टाफ होना चाहिए। मौजूदा समय में चार चिकित्सक हैं। इसमें हड्डी विशेषज्ञ डॉ. अमरनाथ की कैंप और अन्य में ड्यूटी लग जाती है। अधीक्षक का प्रभार होने के चलते फील्ड व अन्य कार्यक्रमों में व्यस्तता रहती है।

डेंटल चिकित्सक अंजलि यादव को इमरजेंसी में नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में इमरजेंसी चलाने में काफी समस्या होती है। चार वार्ड ब्वाय पद के सापेक्ष मात्र एक वार्ड ब्वाय हैं। तीन स्वीपर के सापेक्ष मात्र एक स्वीपर है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।

एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं

सीएचसी पर एक भी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं है। स्टाफ नर्स के भरोसे प्रसव कराया जाता है। ऑन काल एक सर्जन आते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को निजी एवं अन्य चिकित्सालयों में जाना पड़ता है।



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