Published On: Sun, Jul 25th, 2021

Araria News: अवैध ईंट भट्ठों की भरमार से गहराया संकट, जानिए कैसे राजस्व के साथ ही पर्यावरण को भी हो रहा नुकसान


राहुल कुमार ठाकुर,अररिया
बढ़ते प्रदूषण से पर्यावरण को नुकसान विश्वव्यापी समस्या बना हुआ है। बावजूद इसके अररिया में प्रदूषण संकट को बढ़ावा देने वाले दर्जनों ईंट भट्ठे अवैध रूप से संचालित हैं। यह ईंट भट्ठे न केवल सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके बल्कि जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर रजोखर में राजा पोखर के बगल में भी चल रहे हैं। ये जिला प्रशासन और पर्यावरणविदों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इनमें से अधिकांश ईंट भट्ठा संचालकों ने न तो खनन विभाग से ही अनुमति ले रखा है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से। वहीं इनके संचालन से राजस्व और पर्यावरण को साथ नुकसान हो रहा।

नियमों को ताक पर रख संचालित है भट्ठा
जानकारों की मानें तो सत्र 2019-20 और 2020-21 में बिना खनन राजस्व जमा किए और बिना पर्यावरण और प्रदूषण विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र के ही भट्ठा को संचालित किया जा रहा है। इतना ही नहीं इन ईंट भट्ठों में नाबालिगों से भी काम धड़ल्ले से लिया जाता है। बिना खनन टैक्स जमा किए ईंट भट्ठा का संचालन किया जाना बिहार लघु खनिज नियम का उल्लंघन है। कानून कहता है कि ऐसे ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है। भट्ठा संचालन के लिए प्रमाण पत्र लिया जाना अति आवश्यक है। जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किये बिना ही जिले में ईंट भट्ठे संचालन चल रहा है।

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विभाग नहीं देता आरटीआई का जवाब
जिले के जाने माने आरटीआई एक्टिविस्ट प्रसेनजीत कृष्ण का कहना है कि खान एवं भूतत्व विभाग से ईंट भट्ठा मालिकों को दिए गए प्रदूषण अनापत्ति प्रमाण पत्र की छायाप्रति आरटीआई से मांगी गई, लेकिन रिमाइंडर देने के बावजूद विभाग की ओर से इसे उपलब्ध नहीं कराया गया। जिससे स्पष्ट होता है कि जिले में अधिकांश ईंट भट्ठा संचालकों की ओर से इसे अवैध रूप से संचालित किया जाता है। प्रसेनजीत कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लाखों रुपये खर्च कर राजा पोखर का उद्घाटन किया था, आज वह वीरान और अगल-बगल के इलाका मरुभूमि के समान हो गया है। मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट ने सदर एसडीएम को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग की है।

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नियम कहता है…
– ईंट भट्ठे के संचालन आबादी से दो सौ मीटर से दूर होना चाहिए
– मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी
– लोहे के बजाय सीमेंट की चिमनी होनी चाहिए
– पर्यावरण लाइसेंस और प्रदूषण विभाग से अनुमति जरूरी
– 750 एसएमसी से अधिक प्रदूषण नहीं होना चाहिए

लेकिन इन सब नियमों को ताक पर रखकर ईंट भट्ठा का संचालन अवैध रूप से होता है। जिस पर कार्रवाई जरूरी है। मामले पर सदर एसडीएम शैलेशचंद्र दिवाकर ने आवेदन मिलने की बात करते हुए जांच किए जाने की बात कही। अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठा संचालकों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।



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