Published On: Sat, Oct 3rd, 2020

Bihar Election: सहरसा जिले में क्या है चुनावी समीकरण, यहां जानिए- महिषी, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर और सोनवर्षा सीट का हाल


कुमार बन्दन वर्मा, सहरसा
बिहार विधान सभा 2020 (Bihar Election 2020) के चुनाव के लिए चुनाव तिथि की घोषणा हो चुकी है। सभी क्षेत्रों में विभिन्न दल और उसके प्रत्याशी चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। सहरसा जिले में भी चुनावी बहस की चर्चा अपने परवान पर है। सहरसा जिले की चारों विधानसभा सीट के लिए किसी भी दल ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा अब तक नहीं की है। ऐसे में अटकलों का बाजार गर्म है। जिले के मतदाता, वर्तमान विधायक के पिछले कार्यकाल के अच्छे बुरे कार्यों की समीक्षा में लगे हुए हैं। हालांकि सहरसा जिले की चारों विधानसभा सीट पर चुनाव अंतिम चरण में 7 नवंबर को होना है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि यहां तुरुप का पत्ता भी अंतिम समय में ही खोला जाएगा। आइए जानते हैं सहरसा जिले की चारों विधानसभा सीटों के समीकरण के बारे में…


सहरसा विधानसभा सीट: इस बार विधानसभा चुनाव 2020 में 3 लाख 53 हजार 903 मतदाता अपने विधायक का चुनाव करने जा रहा है। वैसे यहां के मौजूदा विधायक राजद के अरुण कुमार हैं, जिससे अमूमन हर जाति और समुदाय के लोग नाराज चल रहे हैं। अरुण कुमार ने वर्ष 2015 में भाजपा के निवर्तमान विधायक आलोक रंजन को 39 हजार 206 मतों से हराया था। 2015 के चुनाव में सहरसा विधान सभा से कुल मतदाता 3 लाख 36 हजार 081 थे, जिसमें 1 लाख 93 हजार 991 (लगभग 57 फीसदी) मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। जबकि 2010 के चुनाव में राजद के यही अरुण कुमार भाजपा के आलोक रंजन से 7979 मतों के अंतर से हार गए थे। इस तरह एकबार फिर 2020 में सहरसा विधान सभा की सीट चुनावी दृष्टिकोण से काफी दिलचस्प होने वाला है, जब राजद और भाजपा गठबंधन से बीच सीधी टक्कर होने वाली होगी।

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महिषी विधानसभा सीट: सहरसा जिले की महिषी सीट पर अभी राजद का कब्जा है। हालांकि महिषी अभी विधायक विहीन है क्योंकि हाल ही में महिषी के विधायक राजद के कद्दावर नेता अब्दुल गफ्फूर की मृत्यु हो चुकी है। इस दृष्टिकोण से प्रायः हर दल के अंदर इसे कब्जाने की होड़ मची हुई है। 1967 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट पर इसबार 2 लाख 87 हजार 707 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। जहां तक पिछले चुनावों की बात है तो 2015 में इस सीट पर राजद के अब्दुल गफ्फूर ने एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी चंदन कुमार को 26 हजार 135 मतों से हराया था। इस सीट पर 2015 में एक निर्दलीय प्रत्याशी गौतम कृष्ण की भी काफी चर्चा थी, जो तीसरे नंबर पर था। 2020 में इस गौतम कृष्ण के नाम की काफी चर्चा देखने को मिल रही है। महिषी विधान सभा सीट पर 2010 में भी राजद के अब्दुल गफ्फूर ने ही एनडीए गठबंधन के राजकुमार को हराकर अपना कब्जा जमाया था।

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सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा सीट: सहरसा जिले की सिमरी बख्तियारपुर सीट पर वैसे तो शुरुआत से कांग्रेस समर्थक एक खास परिवार का दबदबा था, मगर सामाजिक समीकरण बदलने के साथ यहां भी काफी कुछ बदला। फिलहाल यहां के वर्तमान विधायक राजद के जफर आलम हैं, जिन्होंने 2019 के विधानसभा उपचुनाव में जदयू के अरुण कुमार को हराया था। यह सीट 2015 के जदयू विधायक दिनेश चन्द्र यादव के सांसद बन जाने की वजह से खाली हुई थी। फिलहाल 2020 के चुनाव में यहां 3 लाख 22 हजार 704 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं। जहां तक पिछले चुनाव की बात है तो यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस क्षेत्र में सांसद दिनेश चंद्र यादव की अच्छी पकड़ है। यही वजह थी कि पिछले 2015 के चुनाव में इन्होंने इस इलाके के खास परिवार के सदस्य एल जे पी के यूसुफ सलाउद्दीन को 37 हजार 806 मतों से हराया था। जबकि 2010 के चुनाव में इन्ही के आशीर्वाद से पिछले उपचुनाव में हारने वाले अरुण कुमार विधायक बने थे। वर्तमान में गठबंधन के रूपरेखा पर निर्भर करता है कि अगली बाजी किसके हाथ लगेगी।

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सोनवर्षा विधानसभा सीट: सहरसा जिले की एकमात्र सुरक्षित क्षेत्र सोनवर्षा विधान सभा का है। यहां वर्तमान में पिछले दो टर्म से जदयू के विधायक रत्नेश सादा का कब्जा है। स्वभाव से काफी मिलनसार और जमीनी नेता रहे सादा को फिलहाल कोई टक्टर देता हुआ नहीं दिखता। कुछ दिनों पहले तक इस क्षेत्र में राजद के योगेंद्र राम की चर्चा भी थी लेकिन कुछ दिनों पहले उनकी एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। जहां तक पिछले चुनाव की बात है तो 2015 में जेडीयू के रत्नेश सादा ने एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी एलजेपी की सरिता देवी को 53 हजार 763 मतों के एक बड़े अंतर से चुनाव में शिकस्त दी थी। 2010 में रत्नेश सादा ने सरिता देवी को ही लगभग 30 हजार वोटों के अंतर से हराया था।

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