Published On: Mon, Apr 12th, 2021

Bihar Naxal Operation : जुगाड़ से ग्रेनेड और लॉन्चर, नक्सलियों का ‘कोलकाता कनेक्शन’, बिहार पुलिस के उड़े होश


हाइलाइट्स

  • बिहार में नक्सलियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन तेज
  • जुगाड़ से बिहार में नक्सली बना से ग्रेनेड और लॉन्चर
  • ग्रेनेड बनाने का सामान कोलकाता से आ रहा

जहानाबाद/पटना
बिहार में नक्सली जुगाड़ टेक्नोलॉजी से अत्याधुनिक हथियार बना रहे हैं। आईईडी (Improvised Explosive Device) के अलावा ग्रेनेड और लॉन्चर जैसे हथियार और गोला बारूद खुद तैयार कर रहे हैं। बड़े शहरों से इसके सामान मंगाए जाते हैं और छोटी जगहों पर ढांचा तैयार किया जाता है।

दानापुर-जहानाबाद में पकड़े गए नक्सलियों से खुलासा
जब सबकुछ तैयार हो जाता है तो ग्रेनेड को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी नक्सलियों के बीच बैठे एक्सपर्ट की होती है। दानापुर और जहानाबाद से पकड़े गए नक्सलियों से ये चौंकानेवाला खुलासा हुआ है। दानापुर के गजाधर चक और जहानाबाद के बिस्तौल में पिछले दिनों खुफिया सूचना पर एसटीएफ ने छापेमारी की थी।

तलाशी में हैंड ग्रेनेड, अद्धनिर्मित ग्रेनेड, डेटोनेटर, फ्यूज, ग्रेनेड का ढांचा और बड़ी संख्या में दूसरे सामान मिले थे। गजाधर चक के जिस घर में छापेमारी हुई थी, वहां लेथ मशीन भी जब्त की गई थी। परशुराम सिंह, संजय सिंह और गौतम सिंह पकड़े गए थे। परशुराम और गौतम बाप-बेटे हैं।

कोलकाता से आता था हथियार बनाने का सामान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ में ये बात सामने आई कि इन तक ग्रेनेड लॉन्चर, आईईडी और दूसरे हथियार बनाने में इस्तेमाल होनेवाला सामान कोलकाता से आता था। इन सामानों को जहानाबाद के बिस्तौल में छिपाने की व्यवस्था थी। वहां से थोड़ा-थोड़ा कर ये सामान दानापुर लाए जाते थे। यहां लेथ मशीन की मदद से गौतम सिंह ग्रेनेड लाॉन्चर और आईईडी का ढांचा तैयार करता था। फिर इन ढांचों को वापस बिस्तौल भेज दिया जाता या फिर सीधे नक्सलियों तक पहुंचा दिया जाता।

छापेमारी में आईईडी में इस्तेमाल होने वाले मेटलिक बॉडी, ग्रेनेड बनानेवाले वाला सामान, मेटलिक सेल, हैंड ग्रेनेड, हैंड ग्रेनेड के पार्ट, ग्रेनेड लॉन्चिंग बेस, सेफ्टी पिन, सेफ्टी फ्यूज, प्रेशर स्विच, हैंड ग्रेनेड के लिवर के अलावा ग्रेनेड लॉन्चर बनाने की तकनीकी से जुड़ा एक कागज भी मिला था।

हैंड ग्रेनेड कवर देखकर पुलिस के उड़े होश
नक्सलियों के विंग में बड़ी संख्या में विस्फोटक और हथियारों के एक्सपर्ट शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में एक वक्त काफी सक्रिय रहे पीडब्ल्यूजी (People’s War Group) के नक्सली विस्फोटकों के बारे में अच्छी खासी जानकारी रखते थे। उन्हें शुरुआती दौर में लिट्टे (Liberation Tigers of Tamil Eelam) से प्रशिक्षण मिला था। पीडब्ल्यूजी ने उत्तर भारत के चुनिंदा नक्सलियों को प्रशिक्षण दिया। बाद में वे दूसरे को ट्रेंड करते गए।

ग्रेनेड सिर्फ ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बनाया जाता है। इसकी स्पलाई सेना, अर्द्धसैनिक बल और राज्य की पुलिस को होती है। लेकिन नक्सली जुगाड़ टेक्नोलॉजी से इसे बनाने में माहिर हो गए हैं। ग्रेनेड का बाहरी हिस्सा मेटल का रहता है। इसके भीतर विस्फोटक और डेटोनेटर (रिले टाइमर) लगता है। विस्फोटक के तौर पर हाई एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल करते हैं। ग्रेनेड में दो तरह के रिले टाइमर होता है। एक चार और दूसरा सात सेकेंड पर विस्फोट करता है। नक्सलियों के पास से पहले भी ऐसे ग्रेनेड बरामद हुए हैं। अंतर इसके कवर को लेकर हैं।



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