Published On: Sat, Aug 14th, 2021

Indian Flag GK: पहले ऐसा दिखता था हमारा तिरंगा, कई बार बदले रंग, जानें भारत के झंडे के बारे में


हाइलाइट्स

  • पहले कैसा दिखता भारत का झंडा?
  • जानें कितनी बार बदला गया तिरंगा
  • यहां हैं Indian Flag से जुड़े सभी फैक्ट्स

Indian Flag History: स्‍वतंत्रता दिवस आ गया है, बाजार से लेकर घरों के छत तक हर जगह अब हमारा प्‍यारा तिरंगा झंडा लहराता दिख रहा है। हर देशवासी अपने इस झंडे से जितना प्‍यार करता है, उतना ही इसके आन-बान-शान की गरिमा बनाए रखने के लिए मेहनत करता है। झंडे के मौजूदा स्‍वरूप को 22 जुलाई 1947 भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया, तब से झंडे का यही डिजाइन है, इस झंडे को 26 जनवरी 1950 को राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया।

अभी ऐसा है तिरंगा
देश के तिरंगे में नाम के स्‍वरूप तीन अलग-अलग रंग की पट्टियां होती हैं, जिसमें सबसे ऊपर केसरिया फिर सफेद और सबसे नीचे हरे रंग की प‍ट्टी होती है। झंडे की चौड़ाई व लंबाई का अनुपात 2-3 का होता है। झंडे के बीच में सफेद पट्टी पर नीले रंग का अशोक चक्र होता है, जिसमें 24 तीलियां होती है।

7 अगस्‍त 1906 को पहला झंडा
आजादी के पहले 7 अगस्‍त 1906 को पारसी बागान चौक, कोलकत्‍ता में पहला ध्‍वज फहराया गया था, जिसे उस समय क्रांतिकारियों ने राष्‍ट्रीय ध्‍वज की संज्ञा दी थी। इस ध्‍वज में हरे, पीले और लाल रंग की पट्टियां थी। हरे रंग की पट्टी पर जहां कमल का फूल, वहीं बीच के पीले रंग पर वंदेमातरम व लाल रंग पर चांद-सूरज बने थे।
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पेरिस में फहराया गया दूसरा झंडा
दूसरा झंडा पेरिस में फहराया गया था, हालांकि इसके समय को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ का कहना है कि मैडम कामा व उनके साथियों द्वारा 1907 में फहराया गया था, वहीं कुछ का कहना है कि यह घटना 1905 में हुई थी। यह ध्‍वज भी रंग में पहले जैसा ही था, लेकिन डिजाइन में बदलाव किया गया था।, इसमें ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल और सात तारे थे, जो सप्‍तऋषि को दर्शाते हैं। यह झंडा बर्लिन में हुए समाजवादी सम्‍मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

बीसेंट और तिलक ने फहराया तीसरा झंडा
घरेलू शासन आंदोलन के दौरान डॉ एनी बीसेंट और लोकमान्‍य तिलक ने तीसरा ध्‍वज 1917 में फहराया था। इस झंडे में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां थी। इसमें भी सप्‍तऋषि के अभिविन्‍यास में इस पर बने सात सितारे थे, वहीं बांई और ऊपरी किनारे पर यूनियन जैक था, एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में फहरा चौथा झंडा
आंध्र प्रदेश में एक युवक ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में चौथा ध्वज फहराने के साथ उसे गांधी जी को सौंप दिया। यह कार्यक्रम साल 1921 में अब के विजयवाड़ा में किया गया था। यह झंडा लाल और हरे रंग में बना था, जिसमें देश के दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्‍दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्‍व दिया गया था। झंडे को देखने के बाद गांधी जी के सुझाव पर इसमें शेष समुदाय का प्रतिनिधित्‍व करने के लिए सफेद पट्टी और एक चलता हुआ चरखा जोड़ा गया।
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पांचवा झंडा
पांचवे झंडे को पहली बार राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पारित किया गया, यह झंडा अभी वाले झंडे से थोड़ा ही अलग था, इसमें अशोक चक्र की जगह चरखा था, बाकि सब समान था। इस ध्‍वज को साल 1931 में लाया गया था।

छठां झंडा तिरंगा
तिरंगा को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने स्‍वतंत्र भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया। इसमें सिर्फ एक बदलाव किया गया, चरखे की जगह धर्म चक्र अशोक को रखा गया। तब से आज तक हमारे प्‍यारे तिरंगे का स्‍वरूप वही है।



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