Published On: Sat, Aug 14th, 2021

Jana Gana Mana: भारत का राष्ट्र गान बनने से पहले इस फिल्म में सुना गया था जन-गण-मन, जानें फैक्ट्स


हाइलाइट्स

  • किस फिल्म में सुना गया था जन-गण-मन?
  • जानें राष्ट्र गान से जुड़े सभी फैक्ट्स

Facts About Jana Gana Mana: भारत का राष्ट्रगान जब बजता है, तो हर कोई उसके सम्‍मान में खड़ा हो जाता है। भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन-गन-अधिनायक जय हे आज से ठीक 107 साल पहले 27 दिसंबर 1911 को कोलकत्‍ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन के गाया गया था, इसे गाने वाली थी नोवेल पुरस्‍कार विजेता और इस राष्ट्रगान के रचयिता राष्ट्रकवि रविंद्र नाथ टैगोर की भांजी सरला, उन्‍होंने स्‍कूली बच्‍चों के साथ यह गान बंगाली और हिंदी भाषा में किया था। उसी साल गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर ने इसकी रचना की थी। उन्होंने पहले राष्ट्रगान को बंगाली में लिखा था। बाद में सुभाष चंद्र बोस के निवेदन पर आबिद अली ने इसका हिंदी और उर्दू में रूपांतरण किया था, बाद में इसकी अंग्रेजी में भी रचना की गई, यह हिंद सेना का नेशनल ऐंथम था। वहीं 24 जनवरी 1950 को आजाद भारत की संविधान सभा ने इसे अपना राष्ट्रगान घोषित किया।

पांच पदों में लिखी गई पूरी कविता
राष्ट्रगान को रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा 1911 में लिखी गई एक कविता से लिया गया है, यह कविता 5 पदों में लिखी गई है, जिसके पहले पद को ही राष्ट्रगान के रूप में लिया गया। खुद रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में आंध्र प्रदेश के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में यह गीत पहली बार गाया, जिसके बाद कॉलेज एडमिनिस्‍ट्रेशन ने इसे मॉर्निंग प्रेयर बना लिया। वहीं सन 1945 में एक फिल्‍म हमराही बनी थी जिसमें इस राष्ट्रगान का इस्‍तेमाल हुआ था, साथ ही राष्‍ट्रगान बनने से पहले ही देहरादून के द दून स्‍कूल ने इस संगीत को अपना आधिकारिक गीत बना रखा था। देश आजाद होने के बाद 14 अगस्त 1947 की रात पहली बार संविधान सभा का समापन इसी राष्ट्रगान के साथ किया गया। वहीं 1947 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल से राष्ट्रगान के बारे में जानकारी मांगी गई तो महासभा को जन-गण-मन की रिकॉर्डिंग दी गई।
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52 सेकेंड का समय लगता
राष्ट्रगान को गाने में 52 सेकेंड का समय लगता है, वही इसके पहली और अंतिम पंक्ति गाने में 20 सेकेंड का समय लगता है, राष्ट्रगान को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका अनुपालन करना जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

अंग्रेजों ने गॉड सेव दि क्वीन गीत को किया था अनिवार्य
अंग्रेजों ने 1870 में अपना गीत गॉड सेव दि क्वीन गीत को गाना अनिवार्य कर दिया था। अंग्रेजों के इस आदेश से उस वक्त के सरकारी अधिकारी बंकिमचंद्र चटर्जी काफी आहत हुए थे। इसके बाद उन्होंने 1876 में इस गीत के विकल्प के तौर पर संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण से वंदे मातरम नए गीत की रचना की थी। शुरूआत में इसके केवल दो पद रचे गए थे, जो केवल संस्कृत में थे।
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हमारे राष्‍ट्र गान के बारे में दिलचस्‍प तथ्‍य

  • 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर इस गाने को राष्ट्रगान के तौर पर अपना लिया गया।
  • राष्ट्रगान के बोल और धुन स्वयं रवीन्द्रनाथ टैगोर ने आन्ध्रप्रदेश के मदनापल्ली में तैयार की थी।1
  • बेसेन्ट थियोसोफिकल सोसायटी की प्रिंसिपल और कवि जेम्स एच. कजिन्स की पत्नी मारगैरेट ने राष्ट्रगान के अंग्रेजी अनुवाद के लिए म्यूजिकल नोटेशन्स तैयार किए थे।
  • कानून के मुताबिक राष्ट्रगान गाने के लिए किसी को बाध्य नही किया जा सकता।
  • राष्ट्रगान के नियमों का पालन नही करने व राष्ट्रगान का अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ इनसल्‍ट टू नेशनल ऑनर एक्‍ट-1971 की धारा-3 के तहत कार्रवाई की जाती हैं।
  • ऐसा कहा जाता रहा है कि टैगोर ने इस गीत को अंग्रेज जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में लिखा था। 1939 में लिखे एक पत्र में टैगोर ने इस बात को खारिज किया था।



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