Published On: Fri, Aug 27th, 2021

Janmashtami 2021 in Mathura : जन्माष्टमी पर जन्मभूमि मंदिर में रात्रि डेढ़ बजे तक होंगे दर्शन, मुख्य कार्यक्रम रात में 11 बजे से शुरू होगा

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Janmashtami 2021 in Mathura : श्री शर्मा ने बताया कि जन्मस्थान में जन्माष्टमी कार्यक्रमों की शुरुआत शहनाई एवं नगाड़े वादन से होगी। प्रात: अभिषेक के कुछ समय बाद  पुष्पार्चन का कार्यक्रम प्रात: 10 बजे भागवत भवन में होगा तथा इस अवसर पर भजन-गायन सुप्रसिद्ध भजन गायिका कीर्ति किशोरी के द्वारा किया जाएगा। जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात्रि 11 बजे गणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू होगा।

उन्होंने बताया कि कोरोना को देखते हुए लोगों से श्रीकृष्ण जन्म के समय रात 12 बजे अपने घर में ही घंटे, घड़ियाल बजाने एवं शंखध्वनि करने को कहा गया है। रात में ठाकुर के महा अभिषेक के बाद जन्म के दर्शन के लिए मन्दिर के पट यानी दरवाजे डेढ़ बजे तक खुले रहेंगे।

श्री शर्मा ने बताया कि देश-विदेश आनेवाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि के सभी संपर्क मार्गों पर जूताघर एवं सामान घर की व्यवस्था की गई है। सभी आवश्यक  स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लाउडस्पीकर के माध्यम से इस बार निदेर्श दिए जाएंगे, साथ ही बैरीकेडिंग इस प्रकार से की जा रही है कि श्रद्धालु कम से कम समय में दर्शन कर सकें। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश गोविन्द नगर द्वार (गेट नं०-3)  से होगा एवं निकास मुख्य द्वार (गेट नं०-1) से होगा।

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जन्मस्थान के प्रबंधकों ने श्रद्धालुओं से  जन्मभूमि के लिए प्रस्थान करते समय मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट की रिंग, थैला, माचिश, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू ,चाकू, ब्लेड, अन्य कोई भी इलैक्ट्रोनिक सामान को अपने साथ न लाने का अनुरोध किया है। जो श्रद्धालु ऐसा नहीं कर सकते है वे मार्ग में बने सामान घर में सामान जमा कर सकते हैं लेकिन उनसे उसकी रसीद/कूपन अवश्य लेने की सलाह दी गई है।

श्री शर्मा ने बताया कि प्रसाद बनाना अभी से शुरू हो गया है। लड्डू गोपाल को इस पवित्र दिवस पर भारी मात्रा में लड्डू एवं मेवा-पाग का भोग लगाया जाएगा। भगवान के भोग के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वादिष्ट लड्डुओं को कुशल  कारीगर एवं भक्तगण रात-दिन भाव और श्रद्धा के साथ बना रहे हैं। भगवान को मुख्यत: मेवे, कूटू, गोंद एवं मिंगी  के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। कुल मिलाकर जन्मस्थान की निराली भव्य जन्माष्टमी पर वातावरण इतना कृष्णमय होता है कि वहां आनेवाला भक्त भाव विभोर हो जाता है।



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