Published On: Sun, May 16th, 2021

NBT Bihar Exclusive : अररिया के सिविल सर्जन की ‘विस्फोटक’ चिट्ठी, कोरोना पीड़ितों को लेकर मधेपुरा के सरकारी अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप


हाइलाइट्स

  • अररिया के सिविल सर्जन की ‘विस्फोटक’ चिट्ठी
  • कोरोना पीड़ितों को लेकर मधेपुरा के सरकारी अस्पताल पर गंभीर आरोप
  • ‘कोविड पीड़ितों को मधेपुरा का अस्पताल क्यों दाखिल नहीं करता?’
  • एक चिट्ठी ने सिस्टम पर फिर उठाए सुलगते सवाल


मधेपुरा:
बिहार में कोरोना के चलते रोज 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग अपनी तरफ से लोगों को बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।
बात मधेपुरा की करें तो सरकार ने यहां जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज को 500 बेड वाला कोरोना अस्पताल तक घोषित कर दिया है। यहां के अधिकारी भी दावा कर रहे हैं कि उनके पास सब कुछ उपलब्ध है और वो मरीज के इलाज के लिए हरदम तैयार हैं। लेकिन बगल के जिले अररिया के सिविल सर्जन की एक चिट्ठी ने इन दावों में ही विस्फोट कर दिया है।

अररिया के सिविल सर्जन की चिट्ठी पढ़िए
अररिया के सिविल सर्जन की ये चिट्ठी पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे। ये चिट्ठी अररिया के सिविल सर्जन ने जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज मधेपुरा के अधीक्षक को लिखी है। सिविल सर्जन ने लिखा है कि ‘अनुमंडलीय अस्पताल फारबिसगंज में अवस्थित डीसीएचसी सेंटर में कोविड-19 से ग्रसित गंभीर रोगीयों को सरकार के निदेशानुसार बेहतर इलाज हेतु जब आपके संस्थान में भेजा जाता है तो बेड खाली नही होने से संबंधित सूचना दे कर उक्त गंभीर रोगी को भर्ती करने से इनकार कर दिया जाता हैं तथा उस मरीज को जेनरल वार्ड में रखने हेतु निदेश दिया जाता है।

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‘कोविड पीड़ितों को नहीं लिया जाता डेडिकेटेड अस्पताल में’
इसी चिट्ठी में आगे लिखा गया है कि ‘यह भी कहा जाता है कि जब बेड खाली होगा तब मरीज को कोविड वार्ड में लिया जाएगा। कोविड मरीज के परिजनों के अनुसार आपके संस्थान के कर्मियों के द्वारा टालमटोल की नीति अपनाई जाती है। इस वजह से कोविड पीड़ित गंभीर मरीजों की स्थिति काफी बिगड़ जाती है। जिससे उनकी मृत्यु होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जनहित के दृष्टिकोण से इस संबंध में अपने स्तर से उक्त गंभीर मरीजों को अपने संस्थान में ससमय बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की कृपा की जाए।’
पढ़िए ये पूरी चिट्ठी यहां

Letter

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क्या हैं इस चिट्ठी के मायने?
अररिया के सिविल सर्जन की इस चिट्ठी के मायनों को समझें तो ये राज्य के सिस्टम पर बड़ा आरोप है। एक जिले का सिविल सर्जन खुले तौर पर दूसरे जिले के बड़े सरकारी अस्पताल में कोरोना पीड़ितों के इलाज पर सवाल उठा रहा है। ये चिट्ठी राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मंगल पांडेय को भी जरूर पढ़नी चाहिए। ये सिर्फ एक चिट्ठी नहीं बल्कि कोरोना काल में बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए ऐसा आईना है जिसमें देखने पर किसी को भी शर्म आएगी।

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मेडिकल कॉलेज अधीक्षक ने आरोपों को किया खारिज
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर बैधनाथ ठाकुर ने कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं वो बेबुनियाद हैं। बैद्यनाथ ठाकुर के मुताबिक ‘जिस मरीज के बारे में यह कहा गया है वह मरीज कोविड नेगेटिव था। हमलोग काफी अच्छा काम कर रहे हैं।’

सवाल भी यही है कि अगर आप अच्छा काम कर रहे हैं तो दूसरे जिले के सिविल सर्जन ने आप पर उंगली कैसे उठाई। कुछ तो वजह रही होगी, कोई यूं ही ऐसी विस्फोटक सरकारी चिट्ठी नहीं लिखता।



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